अमेरिका से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और चैटजीपीटी जैसी तकनीकों पर भरोसा करने वालों को झकझोर कर रख दिया है। हुआ यूं कि 60 साल के एक शख्स ने अपने खानपान में नमक का सुरक्षित विकल्प जानने के लिए चैटजीपीटी से सलाह ली। जवाब में AI ने कई विकल्प दिए, जिनमें “सोडियम ब्रोमाइड” भी शामिल था। शख्स ने बिना दोबारा जांच-पड़ताल किए, लगातार तीन महीने तक सोडियम ब्रोमाइड को खाने में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। नतीजा इतना खतरनाक निकला कि उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें ICU में भर्ती कराना पड़ा।
डॉक्टरों ने जांच में पाया कि मरीज को ‘ब्रोमिज्म’ नाम की गंभीर स्थिति हो गई थी, जिसमें मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की सेहत तेजी से गिरने लगती है। मेडिकल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सोडियम ब्रोमाइड का इस्तेमाल सालों पहले कुछ बीमारियों के इलाज में होता था, लेकिन लंबे समय तक इसका सेवन शरीर में जहर जैसा असर छोड़ता है। इस मामले की पूरी रिपोर्ट “अमेरिकन कॉलेज ऑफ फिजिशियन्स” के जर्नल में भी छपी है और यह साफ तौर पर चेतावनी देती है कि AI से मिली मेडिकल सलाह पर आंख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।
असल में, AI चैटबॉट्स जैसे चैटजीपीटी इंटरनेट के खुले डाटा और पुराने डेटाबेस के आधार पर जवाब देते हैं। वे आपके मेडिकल टेस्ट, एलर्जी, हेल्थ हिस्ट्री या डॉक्टर की रिपोर्ट्स जैसी अहम जानकारियों को नहीं जानते। नतीजतन, कई बार ये ऐसे सुझाव भी दे सकते हैं जो दिखने में सही लगें, लेकिन असल में जानलेवा साबित हों। पहले के AI मॉडल्स हेल्थ सलाह देने से पहले “मैं डॉक्टर नहीं हूं” जैसी चेतावनी जरूर देते थे, लेकिन हालिया समय में यह डिस्क्लेमर कम होता जा रहा है और AI बिना हिचकिचाहट मेडिकल टिप्स देने लगा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य, डाइट और दवाइयों से जुड़े किसी भी मामले में प्राथमिकता डॉक्टर की राय को देनी चाहिए। इस केस में भी अगर समय रहते डॉक्टरों की मदद नहीं ली जाती, तो मरीज की जान जा सकती थी। अमेरिका में यह घटना सोशल मीडिया और न्यूज़ शो पर चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां डॉक्टर और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स आम लोगों को आगाह कर रहे हैं कि तकनीक मददगार जरूर है, लेकिन सेहत के मामले में मानव विशेषज्ञ की जगह नहीं ले सकती।